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Tuesday, March 24, 2020

नवगीत : कोरोना का शृंगार : संजय कौशिक 'विज्ञात'




नवगीत 
कोरोना का शृंगार
संजय कौशिक 'विज्ञात' 

मापनी~~14/14 


देख रतनारे अधर ले, 
कामुकी सी कामिनी वो। 
भय अजब देती वहाँ पर,
जब निकट थी दामिनी वो॥  
 
देख के शृंगार दर्शक, 
आह कुछ पाषाण भरते।
फिर क्रिया जितने कलापें, 
दृश्य मोहक लोग मरते।
कुछ भटकते ताकते से, 
चाँदनी थी यामिनी वो। 

तीव्र श्वासें थामते से, 
हाथ हिय पे धर पुकारे।
मौन बोला फिर शहर ये, 
कौन ये परियाँ उतारे।
मारने का यंत्र लेकर, 
दौड़ती गज गामिनी वो।

देख कर सौंदर्य अद्भुत, 
फेरते हैं लोग मुखड़े।
जो तड़पते खाँसते से,
हँस रहे हैं आज दुखड़े।
सोच कोरोना डरे हैं, 
दिख रही है भामिनी वो।

4
बांध कर मुख आज चलती, 
देख फूलन सी जवानी।
विष भरी बहती हवाएं, 
लिख रही हैं नव कहानी।
शव कहे क्रंदन करो कुछ, 
मौन पसरा धामिनी वो।

संजय कौशिक 'विज्ञात'

44 comments:

  1. बांध कर मुख आज चलती,
    देख फूलन सी जवानी।
    विष भरी बहती हवाएं,
    लिख रही हैं नव कहानी।
    शव कहे क्रंदन करो कुछ,
    मौन पसरा धामिनी वो।
    वाह बहुत सुन्दर कोरोना का शृंगार नवगीत

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    1. सुवासिता जी हार्दिक आभार सुंदर, मनोहारी, प्रेरक शब्दों से भरी प्रेरणा दी है आपने

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  2. मारने का यंत्र लेकर दौड़ती गज गामिनी.............।
    बधाई हो।

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    1. प्रधान जी हार्दिक आभार सुंदर, मनोहारी, प्रेरक शब्दों से भरी प्रेरणा दी है आपने

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  3. समसामयिक वाहः👌👌💐💐

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  4. विष भरी बहती हवाएं,
    लिख रही हैं नव कहानी।


    बिल्कुल सही पंक्तियाँ...
    क्या खूब श्रृंगार कर गया आपका गीत हत्यारी कोरोना का

    लता सिन्हा ज्योतिर्मय

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    1. लता जी हार्दिक आभार सुंदर, मनोहारी, प्रेरक शब्दों से भरी प्रेरणा दी है आपने

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  5. देख कर सौंदर्य अद्भुत,
    फेरते हैं लोग मुखड़े।
    जो तड़पते खाँसते से,
    हँस रहे हैं आज दुखड़े।
    सोच कोरोना डरे हैं,
    दिख रही है भामिनी वो। वाह बेहतरीन रचना आदरणीय 👌

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    1. अनुराधा जी हार्दिक आभार सुंदर, मनोहारी, प्रेरक शब्दों से भरी प्रेरणा दी है आपने

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  6. वाह वाह, इस भयानक वातावरण में श्रृंगार रस को ढूंढना एक अद्भुत सृजन है। अभिनंदन सादर अभिनंदन।

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    1. विवेक कविश्वर जी हार्दिक आभार सुंदर, मनोहारी, प्रेरक शब्दों से भरी प्रेरणा दी है आपने

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  7. क्या बात है!! सौंदर्य में भय और विद्रूपता को समा एक मक्खियों का छत्ता बना दिया जिसे आज के बाद लोग सोच समझ कर हाथ डालने की बात तो दूर देखेंगे भी सोच समझ कर । बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है ।बधाई

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    1. विद्योत्मा जी हार्दिक आभार सुंदर, मनोहारी, प्रेरक शब्दों से भरी प्रेरणा दी है आपने

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  8. अद्वितीय नवगीत
    आ.सर जी शुभकामनाएं 🙏

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  9. वाह !बेहतरीन सृजन सर 👌

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  10. बहुत सुंदर बेहतरीन सृजन बधाई आपको

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  11. आपकी अद्भुत कल्पना शक्ति को नमन 🙏🙏🙏 कोरोना जैसे भयानक रोग पर श्रृंगार रस में डूबा नवगीत बहुत ही सुंदर सृजन है ....खूबसूरत बिम्ब,कथन और संदेश 👌👌👌 ढेर सारी बधाई 💐💐💐💐

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    1. विदुषी जी हार्दिक आभार सुंदर, मनोहारी, प्रेरक शब्दों से भरी प्रेरणा दी है आपने

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  12. मारने का यंत्र लेकर दौड़ी वो गजगामिनी

    गजब कल्पनाशक्ति

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    1. अनिता जी हार्दिक आभार सुंदर, मनोहारी, प्रेरक शब्दों से भरी प्रेरणा दी है आपने

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  13. बहुत सुंदर सृजन !अद्भुत!👌
    ---अनीता सिंह "अनित्या"

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  14. बहुत सुन्दर सर जी

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    1. बोधन सहाब आत्मीय आभार आपका

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  15. कुछ हटकर👌👌👌👌👌👌👌👌बेहतरन👏👏👏👏👏

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    1. अनुपमा जी आत्मीय आभार आपका

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  16. वाह अनमोल एक एक शब्द परिष्कृत

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  17. बहुत शानदार

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  18. बहुत शानदार

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  19. जी वैश्विक आपदा कोरोना पर शानदार सृजन

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  20. कमाल के कलमकार हैं आप।आपकी रचनाएँ अद्भुत होती ही हैंं।पर यह रचना उससे भी आगे की हैं।रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ बहुत बहुत बधाई💐💐

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