copyright

Tuesday, February 17, 2026

स्पर्श तुम्हारा ... डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’

स्पर्श तुम्हारा 




डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’


स्थाई 🌿🌹🌷🥀🌾

मौन मलय मूरत मन-मंदिर,
मधुर मिलन को मीत कहे।।
स्पर्श तुम्हारा ऋतु-विप्लव सा, 
मंद मधुर संगीत कहे।।

1अंतरा   🌹🥀🌹

नयनों में नव नील निमंत्रण,  
नीरव नभ संकेत लिए।   
कंपित कर-कमलों की कोमल  
कस्तूरी-सी प्रीत लिए।   
लाज लता-सी लिपटी देही,  
मन-मरु में मधु-रेत लिए।   
स्वप्न सलोने साँझ-साँवली   
विरह आग ने छेत लिए।।   

पूरक पंक्ति 🌿🌷🌿

कलियों ने घूँघट पट खोले
भ्रमर चहक नवगीत कहे।।
स्पर्श तुम्हारा ऋतु-विप्लव सा 
मंद मधुर संगीत कहे।।

2 अंतरा 🌹🥀🌹

तन तरुवर-सा थरथर डोले
हिय ऋतुराज समीप हुआ।
मोम पिघलता सा आलिंगन 
चुम्बन लय का दीप हुआ। 
साज सजाए पल–पल सुरभित
हृदय स्वाति सा सीप हुआ। 
हर्ष मुकुल में मंथर मादक
मिलन मेंहदी लीप हुआ।। 

पूरक पंक्ति 🌿🌷🌿

मग्न पवन मकरंद-मदनमय
मधु-माधव की जीत कहे।।
स्पर्श तुम्हारा ऋतु-विप्लव सा 
मंद मधुर संगीत कहे।।


3 अंतरा 🌹🥀🌹

गगन-गुहा में गूढ़ नाद से
सृष्टि-सुरों के रूप दिखे।
प्राण-पटल पर अंकित अक्षय
स्नेह-अगाध अनूप दिखे।
नभ के दृग से नित नव नूतन
तेज ध्यान की धूप दिखे।
जीवन-जप में दृढ़ संकल्पित
संबंधों के कूप दिखे।।

पूरक पंक्ति 🌿🥀🌿

चांद चाँदनी चंचल चितवन
मौन चकोरी प्रीत कहे।।
स्पर्श तुम्हारा ऋतु-विप्लव सा 
मंद मधुर संगीत कहे।।


4 अंतरा 🌹🥀🌹

सांध्य सलिल दो नेत्र सरोवर
स्वप्निल हिय आभास करे। 
उर्मि अटल इन वारिधियों की 
प्रेमिल पर  विश्वास करे। 
चट्टानी अवशेष दिखे तो
निर्झर-सा उल्लास करे।
मन-मंजूषा मधु-मंत्रित हो
मुक्त मिलन अहसास करे।।

पूरक पंक्ति 🌿🥀🌿

तारों की थरथर थिरकन भी
मन वीणा को शीत कहे।।
स्पर्श तुम्हारा ऋतु-विप्लव सा 
मंद मधुर संगीत कहे।।


5 अंतरा 🌹🥀🌹

चुम्बक-चेतन चितवन चंचल
चित्त मिलन की प्यास करे। 
रोम-रोम रागांगन रचता
रक्तिम रेखा रास करे। 
नभ-नयनों के नील निलय में
नूतन निशा निवास करे। 
हृदय-हरितिमा हुलसित होकर
हर्षित हर उर उल्लास करे।। 

पूरक पंक्ति 🌿🥀🌿

अधर अधीर सुर्ख अलसाए
प्रबल प्रेम कर–पीत कहे।।
स्पर्श तुम्हारा ऋतु-विप्लव सा 
मंद मधुर संगीत कहे।।


6 अंतरा 🌹🥀🌹

उदित प्रभा नित करे अचंभित
स्मृति का मेघ ’निनाद' करे।
प्रेम पथिक जुगनू का दीपक
तम से यूँ ’संवाद’ करे।
सुप्त पड़ी कुण्डलिनी मानो
चिंता मणि अवसाद करे।
ज्योति बिंब हिय - गर्भ प्रेम के
धरणी सुधा प्रसाद करे।।

पूरक पंक्ति 🌿🥀🌿

साँसों की सरगम सिरहन सी
सरस सुगंधित रीत कहे।
स्पर्श तुम्हारा ऋतु-विप्लव सा 
मंद मधुर संगीत कहे।।

डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’

Monday, February 16, 2026

यक्ष प्रश्न प्रतिबिंब का – डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’



यक्ष प्रश्न प्रतिबिंब का

प्रतिबिंब प्रश्न करता ये मेरा 
क्यों पैदा करने को आतुर थे।
मौन हुई अंतस की गहराई
क्षोभ हृदय के उत्कंठातुर थे ।।

वंश अंश की नींव गढ़ी थी 
पितु दादे पड़दादे ने।
सात पीढ़ियाँ करी तिरस्कृत
यक्ष प्रश्न से सादे ने ।।
जन्म विलक्षण कहते थे सब 
लाड लडाने को रोगातुर थे।।

तू है हर विद्या का ज्ञाता 
मुझमें इतना बोध न था
किंतु भाग्य के हर कोने पर
यूँ निष्ठुर अवरोध न था
पुत्र श्रवण की अभिलाषा में हम
नेत्रहीन निर्धन भावातुर थे।।

फिर भी है त्रुटि स्वीकार हमे
पर तू गलती मत करना
वंश अंश की परम्परा के 
झूठे बोझ नहीं मरना 
अपने सुत से आज्ञा ले लेना 
हम तो ढीठ मूढ़ कामातुर थे।।

डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात‘

देख गाँव ये... डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’

शीर्षक - देख गाँव ये...

डॉ संजय कौशिक 'विज्ञात'

स्थाई ✍️
देख गाँव ये, डगर नाचती।
दिखे जहाँ हर खुशी पली।(नायिका)
गाँव लगे जन्नत हो जैसे 
तू जो मेरे साथ चली।। (नायक)

1 अंतरा ✍️
हाँक बैलगाड़ी मै बैठूँ,
चुपके से तुम्हे निहारूँ। (नायक)
मुरली बना अधर की मुझको,
अपनी हर खुशियाँ वारूँ (नायिका)
(पूरक पंक्ति) 🌿🌿🌿
सुन धड़कन का प्रेम तराना
महक उठे हर एक कली। दोनों।
गाँव लगे जन्नत हो जैसे 
तू जो मेरे साथ चली।। नायक।।

2 अंतरा ✍️
नील गगन ज्यों मिले धरा से
ऐसा हो मिलन हमारा।(नायिका)
आकर्षक अनुबंध प्रेम का 
देखे हमको जग सारा। (नायक)
(पूरक पंक्ति) 🌿🌿🌿
मुझे छिपाना निज बाहों में 
देख न पाए गाँव गली। (नायिका) 
तुम्हे छिपाऊँ निज बाहों में 
देख न पाए गाँव गली। (नायक)
देख गाँव ये, डगर नाचती।
दिखे जहाँ हर खुशी पली।(नायिका)

3 अंतरा ✍️
साँझ ढले घर लौट चलेंगे 
चंदा जब राह दिखाए। (नायक) 
हँसी अधर की उजली किरणें 
मन का दीपक बन जाए।।(नायिका)
(पूरक पंक्ति) 🌿🌿🌿
हाथ थाम जीवन जी लेंगे 
ठहरी घड़ियाँ लगें भली। (दोनों)
गाँव लगे जन्नत हो जैसे 
तू जो मेरे साथ चली।। (नायक)

4 अंतिम बंध ✍️
आज गाँव में भ्रमण किया तो
मेरा ये संसार मिला। (नायक)
मांग महकती सिंदूरी सी
तू सच्चा श्रृंगार मिला।। (नायिका)
(पूरक पंक्ति) 🌿🌿🌿
धन्य हुई साँसों की सरगम 
धड़कन सुर में बैठ ढली।। (दोनों)
गाँव लगे जन्नत हो जैसे 
तू जो मेरे साथ चली।। (नायक)
देख गाँव ये, डगर नाचती।
दिखे जहाँ हर खुशी पली।(दोनों)

डॉ संजय कौशिक 'विज्ञात'

Sunday, November 17, 2024

गीतिका : डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’



गीतिका 

डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’

मापनी 
2122 2122 2122 212

रात जो बीती हुई है क्या भुलानी चाहिए।
भूल से भूली हुई क्या स्मृति मिटानी चाहिए।।

लिख दिए थे ग्रंथ इतने कौन पढ़ या सुन सका
नव्य रचना शंख से रच ध्वनि बजानी चाहिए।।

बेटियों सी बन सकेंगी कब नई दुल्हन बता...
देश को नूतन प्रथा कुछ अब चलानी चाहिए।।

काव्य इतना है रचा ये देश पर सोया रहा
एक कविता ओज की कविवर सुनानी चाहिए।।

व्यर्थ के ये तर्क देकर जो यहाँ डंका बजाते
सीख ली जो शिष्टता कुछ तो दिखानी चाहिए।।

गोलियाँ बरसी यहाँ जब संत निर्मल देह पे 
अब अलग ही आज भगवा की कहानी चाहिए।

शत मुखी ज्वाला उगलती रच रहे कविता सभी
चोर का भय मान के क्या कृति छुपानी चाहिए।। 

भागते ही भागते जो चूर होकर गिर गया
शर्त उसको फिर चलाने की लगानी चाहिए।।

वो गले सबसे मिला था कष्ट जो उसको मिले 
हर्ष की है टीस प्यासी अब बुझानी चाहिए।।

मल लिया सिंदूर तन पर मातु का सुनके कथन 
श्रेष्ठ सेवक भक्ति हनुमत सी बढ़ानी चाहिए।।

हाथ ले विज्ञात झण्डा धर्म का अब तान चल ...
नित सनातन के विजय की जय निभानी चाहिए।।

डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’


Sunday, November 10, 2024

गीता का विधान ; भक्ति गीत। ; डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’


🙏 भक्ति गीत 🙏
📕 *गीता का विधान* 📕

मन ही मन में जपता चल तू 
गीता कहे विधान को 
*हृदय बसा हनुमान को।।*

जीवन रथ पर ध्वज हो इनका
कृष्ण सारथी बनता जिनका
रचे वही विज्ञान को।।
*हृदय बसा हनुमान को।।*

अंगराज वो महावीर था
कर्ण नाम का दानवीर था
बढ़ा हाथ ले दान को।।
*हृदय बसा हनुमान को।।*

नेत्र हीनता होती घातक
तड़पे यूँ जन ज्यूँ खग चातक
ज्ञान नहीं अनजान को।।
*हृदय बसा हनुमान को।।*

अर्जुन बन अवसर जो पाते
युद्ध विजेता वे कहलाते
कृष्ण खड़े उत्थान को।।
*हृदय बसा हनुमान को।।*

संजय कौशिक बेरी वाला
राम नाम की रटता माला
समझ चले आख्यान को।।
*हृदय बसा हनुमान को।।*

डॉ. संजय कौशिक 'विज्ञात'

Friday, May 24, 2024

कहानी कैसे लिखें? कहानी लेखन की संक्षिप्त जानकारी – संजय कौशिक 'विज्ञात'

कहानी कैसे लिखें?

कहानी लेखन की संक्षिप्त जानकारी

– संजय कौशिक 'विज्ञात'



अच्छी कहानी लिखने के मुख्य सुझाव-
1
पात्रों का विकास करें- चरित्र विकास किसी भी अच्छी कहानी का अभिन्न अंग है। पात्रों में गहराई होनी चाहिए ताकि पाठक अथवा दर्शक उनसे जुड़ सकें। चाचा चौधरी, साबू कॉमिक्स के इतने प्रसिद्ध होने का असली कारण यह है कि युवा पाठक उन पात्रों से जुड़ सकते हैं। लेखक जब अपनी कहानी लिखे तब उस कहानी में विद्यमान पात्रों को कुछ इस तरह से विकसित करे कि पाठक वर्ग अधिक से अधिक जुड़ सके इसके लिए अपने आस-पास के लोगों का निरीक्षण करे ताकि कहानी से जुड़े संबंधित पात्र को और अधिक निखारा जा सके उसके चरित्र को स्मरणीय बनाया जा सके । 
2
घटनाओं के क्रम को ध्यान से चुनें - कहानी में घटनाओं के क्रम का बहुत महत्व होता है और कहानी के लगभग हर हिस्से पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, तीन तलाक से पीड़ित किसी महिला की कहानी है तो 2010 या 2000 से पूर्व की अवस्था पीड़िता के कष्ट की अनुभूति अलग होगी जबकि आज की कहानी उसकी कष्ट से मुक्ति की कहानी हो सकती है। इस प्रकार से कहानी अलग अलग हो जाती हैं। ऐसा इसलिए समय बदला हालात बदले और कहानी भी बदल गई। इसलिए कहानी पर घटनाक्रम का बहुत अधिक प्रभाव होता है।
3
कहानी लिखने से पूर्व  कथानक की रूपरेखा अवश्य तैयार करनी चाहिए। कहानी लिखने से पूर्व कथानक की रूपरेखा या कहानी का सार तैयार करना उत्तम कथानक के लिए सहयोगी सिद्ध होता है क्योंकि इससे कहानी में विचारों को जोड़ने में सहायता मिलती है और कहानी लिखना शुरू करने से पहले कथानक की कमियों के विषय में लेखक को स्पष्ट जानकारी मिल जाती है। 
4
कहानी में ऐसी बातचीत सम्मिलित करें जो पात्र के विचारों को प्रकट करके पात्र के व्यक्तित्व को और अधिक निखारे- पात्र के विचारों के विषय में बताने से कहानी रोचक बनती है और पाठक को पता चलता है कि पात्र को कैसे क्या और कहाँ से कार्य करने की प्रेरणा मिलती है और यह कथानक को आगे बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होता है।
5
कहानी की रूपरेखा को स्थापित करके और अधिक गतिशील बनाएं- पात्रों द्वारा सुनी गई ध्वनियों या उनके द्वारा देखे गए दृश्यों का वर्णन उन्हें उपयोगी बताते हुए, रूपरेखा को अधिक गतिशील बनाना चाहिए जिससे पाठक के लिए वह कहानी नूतन, ऊर्जावान तथा अधिक आकर्षक दिखे।
6
अपनी कहानी लिखते समय ऐसी परिस्थितियां निर्मित करें जिनसे मुख्य पात्र को अपने सुविधा क्षेत्र से बाहर निकलना पड़े - जब किसी भी कहानी में इस प्रकार की परिस्थितियों का निर्माण होता है तब वह कहानी पाठक के लिए और अधिक रोचक बन जाती है क्योंकि ये परिस्थितियां पात्र के छिपे हुए गुणों को सामने ला सकती हैं जिन्हें समझाने की अपेक्षा कथनात्मक दृश्य अथवा कथनात्मक चलचित्र के माध्यम से सरलता से व्यक्त किया जा सकता है। जैसे रामायण में राम राज्याभिषेक के समय राज्य से 14 वर्ष का वनवास और राज्य भी किसी और को दे देना। 
7
कहानी का समापन ध्यान से चुनें- कहानी के समापन को कुछ इस प्रकार चुना जाना चाहिए जिससे वह समापन की शीघ्रता या लेखक की हड़बड़ी न लगे और पाठक वर्ग के अंतः करण को झकझोर दे तथा अपनी विशेष छाप छोड़े। अधिकतर सभी आकर्षक कहानियों का समापन एक भावनात्मक प्रतिक्रिया को उकसाते हुए आह वाह के क्षण से भरा हुआ होता है। इसलिए समापन बेढंगा अथवा कहानी से पृथक नहीं होना चाहिए।



कहानी लेखन में मुख्य सावधानी इस प्रकार से अवश्य रखें ...

क) सबसे पहले व्याकरण को ध्यान में रखें।
ख) सदैव छोटे और स्पष्ट शब्दों में ही लिखें।
ग) कहानी में नाटक, घटना, कथन आकर्षक होने चाहिए। 
घ) कहानी लिखते समय कभी भी क्लिष्ट शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

कहानी ऐसी होनी चाहिए 

कुल मिलाकर स्मरण योग्य कहानी ऐसी होनी चाहिए जैसे विष्णु शर्मा की पंचतंत्र की कहानी आज भी सभी को स्मरण है। विभिन्न प्राणियों की जीवनी और दृष्टांतों के माध्यम से पंचतंत्र द्वारा बालकों को दिए जाने वाले नैतिक शिक्षा ज्ञान का अनूठा कहानी संग्रह है 
इसी क्रम में भोज का राज सिंहासन विक्रमादित्य को मिला तो 32 शापित अप्सराओं की कहानी आज भी आकर्षण का विषय हैं। जिसके मुख्य लेखक कालीदास हुए हैं। जबकि इतिहासकारों द्वारा ढूंढी गई एक और पांडुलिपि में लेखक का नाम वररुचि लिखा है। इसी पुस्तक के जैन संस्करण के रचियता सिद्धसेन दिवाकर और क्षेमंकर मुनि हुए हैं।
अकबर-बीरबल और तेनाली राम की कहानियों का उद्देश्य मानव समाज को बौद्धिक एवं वैचारिक स्तर पर नव चेतना प्रवाहित करना रहा है ऐसे में लेखकों द्वारा अपने पात्रों को समस्या देकर उसके उचित समाधान के साथ समापन किया गया है। दशकों अथवा वर्षों पूर्व पढ़ी गई ये कहानियाँ आज भी पाठक वर्ग के मस्तिष्क पटल पर अपनी ताजगी इस प्रकार से स्थापित किए हुए हैं मानों पुस्तक अभी पढ़कर चाय की चुस्कियों के लिए विश्राम लिया हो।

किशोर अवस्था तक पहुंचते- पहुंचते वास्तविकता का भान पाठक के मन को  मुंशी प्रेमचंद, चंद्रधर शर्मा गुलेरी, भीष्म साहनी, सुदर्शन, जैनेंद्र, अज्ञेय, यशपाल, फणीश्वरनाथ रेणु, उषा प्रियंवदा, मन्नु भंडारी, ज्ञानरंजन, उदय प्रकाश, ओमप्रकाश बाल्मिकी आदि हिंदी कहानी कारों की कहानियों से जोड़ जाता है जो उसे समाज की वास्तविकता से परिचय कराती हैं। यह संसार काल्पनिक होकर भी काल्पनिक नही लगता क्योंकि प्रत्येक चरित्र समाज के किसी ना किसी वर्ग की परछाई है। बचपन हो या बुढ़ापा मनुष्य कभी भी कहानियों से पृथक नही रह सकता शायद इस लिए क्योंकि प्रत्येक मनुष्य का जीवन एक कहानी ही तो है जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाती है।



कहानियों के मुख्य प्रकार से परिचय
1
लोककथाओं में परीकथाएँ बहु प्रचलित रही हैं इन कहानियों के पात्र जादुई क्षमता के होते हैं जैसे परी, बौने, बौनों का टापू आदि
2
किंवदंतियाँ कहानी इनमें ऐतिहासिक घटनाएं होती हैं, जो ऐतिहासिक साक्ष्यों से दूर की कही जाती हैं इन कहानियों के सुर असुर मुख्य पात्र होते हैं जैसे समुद्र मंथन 
3
मिथक किंवदंतियाँ ये देवताओं या नायकों के विषय में होती हैं। इन कहानियों में उत्पत्ति के विषय में पता चलता है जैसे कि पर्वत कैसे बने ? वर्षा कैसे होती है ? आदि आदि। मिथक कहानी में आम तौर पर सिखाने के लिए नैतिक शिक्षा होती है। 
4
ऐतिहासिक कथा साहित्य एक प्रकार का उपन्यास है जो वास्तविक घटनाओं पर आधारित होता है
5
विज्ञान कथा उपन्यास ऐसी कहानियाँ हैं इनमें एलियंस या रोबोट शामिल हो सकते हैं, विज्ञान की कहानी निकट भविष्य को समझाने का प्रयास करती हैं।
6
जासूसी कहानियों में एक जासूस द्वारा उलझी हुई गुत्थी सुलझाई जाती है। पाठक वर्ग इस  जासूस के साथ रहस्य को सुलझाने हेतु इन कहानियों को बड़े ध्यान से मन लगा कर पढ़ता है।

– संजय कौशिक 'विज्ञात'

Friday, December 23, 2022

गीत : युग वंदन श्री राम को : संजय कौशिक 'विज्ञात'


गीत
युग वंदन श्री राम को
संजय कौशिक 'विज्ञात'
मापनी - 16/13

कष्ट निकंदन खलदल गंजन 
रघु नंदन श्री राम को।
कोटि कोटि यूँ नमन करे नित 
युग वंदन श्री राम को।।

भक्ति करें उर बोल-बोल के
राम नाम ही सार है।
भाव बूंद दृग द्रवित अगर हो
बने यही आधार है।
कर्म जड़ित हरसी पर घिसके 
दे चंदन श्री राम को।।

श्रेष्ठ तपस्या योग साधना 
नीलकंठ भी धारते।
पद्माकर का चक्र बताता
अजपाजप उच्चारते।
राम-नाम से अनहद महके
दे गंधन श्री राम को।।

अष्ट खण्ड यूँ दसों दिशा के
स्वामी वे हर लोक के।
उनका जम्बू द्वीप निरन्तर 
तर्क प्रमाणित ठोक के।
नित्य सनातन विश्व मानता
हिय बंधन श्री राम को।।

©संजय कौशिक 'विज्ञात'