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Friday, May 24, 2024

कहानी कैसे लिखें? कहानी लेखन की संक्षिप्त जानकारी – संजय कौशिक 'विज्ञात'

कहानी कैसे लिखें?

कहानी लेखन की संक्षिप्त जानकारी

– संजय कौशिक 'विज्ञात'



अच्छी कहानी लिखने के मुख्य सुझाव-
1
पात्रों का विकास करें- चरित्र विकास किसी भी अच्छी कहानी का अभिन्न अंग है। पात्रों में गहराई होनी चाहिए ताकि पाठक अथवा दर्शक उनसे जुड़ सकें। चाचा चौधरी, साबू कॉमिक्स के इतने प्रसिद्ध होने का असली कारण यह है कि युवा पाठक उन पात्रों से जुड़ सकते हैं। लेखक जब अपनी कहानी लिखे तब उस कहानी में विद्यमान पात्रों को कुछ इस तरह से विकसित करे कि पाठक वर्ग अधिक से अधिक जुड़ सके इसके लिए अपने आस-पास के लोगों का निरीक्षण करे ताकि कहानी से जुड़े संबंधित पात्र को और अधिक निखारा जा सके उसके चरित्र को स्मरणीय बनाया जा सके । 
2
घटनाओं के क्रम को ध्यान से चुनें - कहानी में घटनाओं के क्रम का बहुत महत्व होता है और कहानी के लगभग हर हिस्से पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, तीन तलाक से पीड़ित किसी महिला की कहानी है तो 2010 या 2000 से पूर्व की अवस्था पीड़िता के कष्ट की अनुभूति अलग होगी जबकि आज की कहानी उसकी कष्ट से मुक्ति की कहानी हो सकती है। इस प्रकार से कहानी अलग अलग हो जाती हैं। ऐसा इसलिए समय बदला हालात बदले और कहानी भी बदल गई। इसलिए कहानी पर घटनाक्रम का बहुत अधिक प्रभाव होता है।
3
कहानी लिखने से पूर्व  कथानक की रूपरेखा अवश्य तैयार करनी चाहिए। कहानी लिखने से पूर्व कथानक की रूपरेखा या कहानी का सार तैयार करना उत्तम कथानक के लिए सहयोगी सिद्ध होता है क्योंकि इससे कहानी में विचारों को जोड़ने में सहायता मिलती है और कहानी लिखना शुरू करने से पहले कथानक की कमियों के विषय में लेखक को स्पष्ट जानकारी मिल जाती है। 
4
कहानी में ऐसी बातचीत सम्मिलित करें जो पात्र के विचारों को प्रकट करके पात्र के व्यक्तित्व को और अधिक निखारे- पात्र के विचारों के विषय में बताने से कहानी रोचक बनती है और पाठक को पता चलता है कि पात्र को कैसे क्या और कहाँ से कार्य करने की प्रेरणा मिलती है और यह कथानक को आगे बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होता है।
5
कहानी की रूपरेखा को स्थापित करके और अधिक गतिशील बनाएं- पात्रों द्वारा सुनी गई ध्वनियों या उनके द्वारा देखे गए दृश्यों का वर्णन उन्हें उपयोगी बताते हुए, रूपरेखा को अधिक गतिशील बनाना चाहिए जिससे पाठक के लिए वह कहानी नूतन, ऊर्जावान तथा अधिक आकर्षक दिखे।
6
अपनी कहानी लिखते समय ऐसी परिस्थितियां निर्मित करें जिनसे मुख्य पात्र को अपने सुविधा क्षेत्र से बाहर निकलना पड़े - जब किसी भी कहानी में इस प्रकार की परिस्थितियों का निर्माण होता है तब वह कहानी पाठक के लिए और अधिक रोचक बन जाती है क्योंकि ये परिस्थितियां पात्र के छिपे हुए गुणों को सामने ला सकती हैं जिन्हें समझाने की अपेक्षा कथनात्मक दृश्य अथवा कथनात्मक चलचित्र के माध्यम से सरलता से व्यक्त किया जा सकता है। जैसे रामायण में राम राज्याभिषेक के समय राज्य से 14 वर्ष का वनवास और राज्य भी किसी और को दे देना। 
7
कहानी का समापन ध्यान से चुनें- कहानी के समापन को कुछ इस प्रकार चुना जाना चाहिए जिससे वह समापन की शीघ्रता या लेखक की हड़बड़ी न लगे और पाठक वर्ग के अंतः करण को झकझोर दे तथा अपनी विशेष छाप छोड़े। अधिकतर सभी आकर्षक कहानियों का समापन एक भावनात्मक प्रतिक्रिया को उकसाते हुए आह वाह के क्षण से भरा हुआ होता है। इसलिए समापन बेढंगा अथवा कहानी से पृथक नहीं होना चाहिए।



कहानी लेखन में मुख्य सावधानी इस प्रकार से अवश्य रखें ...

क) सबसे पहले व्याकरण को ध्यान में रखें।
ख) सदैव छोटे और स्पष्ट शब्दों में ही लिखें।
ग) कहानी में नाटक, घटना, कथन आकर्षक होने चाहिए। 
घ) कहानी लिखते समय कभी भी क्लिष्ट शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

कहानी ऐसी होनी चाहिए 

कुल मिलाकर स्मरण योग्य कहानी ऐसी होनी चाहिए जैसे विष्णु शर्मा की पंचतंत्र की कहानी आज भी सभी को स्मरण है। विभिन्न प्राणियों की जीवनी और दृष्टांतों के माध्यम से पंचतंत्र द्वारा बालकों को दिए जाने वाले नैतिक शिक्षा ज्ञान का अनूठा कहानी संग्रह है 
इसी क्रम में भोज का राज सिंहासन विक्रमादित्य को मिला तो 32 शापित अप्सराओं की कहानी आज भी आकर्षण का विषय हैं। जिसके मुख्य लेखक कालीदास हुए हैं। जबकि इतिहासकारों द्वारा ढूंढी गई एक और पांडुलिपि में लेखक का नाम वररुचि लिखा है। इसी पुस्तक के जैन संस्करण के रचियता सिद्धसेन दिवाकर और क्षेमंकर मुनि हुए हैं।
अकबर-बीरबल और तेनाली राम की कहानियों का उद्देश्य मानव समाज को बौद्धिक एवं वैचारिक स्तर पर नव चेतना प्रवाहित करना रहा है ऐसे में लेखकों द्वारा अपने पात्रों को समस्या देकर उसके उचित समाधान के साथ समापन किया गया है। दशकों अथवा वर्षों पूर्व पढ़ी गई ये कहानियाँ आज भी पाठक वर्ग के मस्तिष्क पटल पर अपनी ताजगी इस प्रकार से स्थापित किए हुए हैं मानों पुस्तक अभी पढ़कर चाय की चुस्कियों के लिए विश्राम लिया हो।

किशोर अवस्था तक पहुंचते- पहुंचते वास्तविकता का भान पाठक के मन को  मुंशी प्रेमचंद, चंद्रधर शर्मा गुलेरी, भीष्म साहनी, सुदर्शन, जैनेंद्र, अज्ञेय, यशपाल, फणीश्वरनाथ रेणु, उषा प्रियंवदा, मन्नु भंडारी, ज्ञानरंजन, उदय प्रकाश, ओमप्रकाश बाल्मिकी आदि हिंदी कहानी कारों की कहानियों से जोड़ जाता है जो उसे समाज की वास्तविकता से परिचय कराती हैं। यह संसार काल्पनिक होकर भी काल्पनिक नही लगता क्योंकि प्रत्येक चरित्र समाज के किसी ना किसी वर्ग की परछाई है। बचपन हो या बुढ़ापा मनुष्य कभी भी कहानियों से पृथक नही रह सकता शायद इस लिए क्योंकि प्रत्येक मनुष्य का जीवन एक कहानी ही तो है जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाती है।



कहानियों के मुख्य प्रकार से परिचय
1
लोककथाओं में परीकथाएँ बहु प्रचलित रही हैं इन कहानियों के पात्र जादुई क्षमता के होते हैं जैसे परी, बौने, बौनों का टापू आदि
2
किंवदंतियाँ कहानी इनमें ऐतिहासिक घटनाएं होती हैं, जो ऐतिहासिक साक्ष्यों से दूर की कही जाती हैं इन कहानियों के सुर असुर मुख्य पात्र होते हैं जैसे समुद्र मंथन 
3
मिथक किंवदंतियाँ ये देवताओं या नायकों के विषय में होती हैं। इन कहानियों में उत्पत्ति के विषय में पता चलता है जैसे कि पर्वत कैसे बने ? वर्षा कैसे होती है ? आदि आदि। मिथक कहानी में आम तौर पर सिखाने के लिए नैतिक शिक्षा होती है। 
4
ऐतिहासिक कथा साहित्य एक प्रकार का उपन्यास है जो वास्तविक घटनाओं पर आधारित होता है
5
विज्ञान कथा उपन्यास ऐसी कहानियाँ हैं इनमें एलियंस या रोबोट शामिल हो सकते हैं, विज्ञान की कहानी निकट भविष्य को समझाने का प्रयास करती हैं।
6
जासूसी कहानियों में एक जासूस द्वारा उलझी हुई गुत्थी सुलझाई जाती है। पाठक वर्ग इस  जासूस के साथ रहस्य को सुलझाने हेतु इन कहानियों को बड़े ध्यान से मन लगा कर पढ़ता है।

– संजय कौशिक 'विज्ञात'

Friday, December 23, 2022

गीत : युग वंदन श्री राम को : संजय कौशिक 'विज्ञात'


गीत
युग वंदन श्री राम को
संजय कौशिक 'विज्ञात'
मापनी - 16/13

कष्ट निकंदन खलदल गंजन 
रघु नंदन श्री राम को।
कोटि कोटि यूँ नमन करे नित 
युग वंदन श्री राम को।।

भक्ति करें उर बोल-बोल के
राम नाम ही सार है।
भाव बूंद दृग द्रवित अगर हो
बने यही आधार है।
कर्म जड़ित हरसी पर घिसके 
दे चंदन श्री राम को।।

श्रेष्ठ तपस्या योग साधना 
नीलकंठ भी धारते।
पद्माकर का चक्र बताता
अजपाजप उच्चारते।
राम-नाम से अनहद महके
दे गंधन श्री राम को।।

अष्ट खण्ड यूँ दसों दिशा के
स्वामी वे हर लोक के।
उनका जम्बू द्वीप निरन्तर 
तर्क प्रमाणित ठोक के।
नित्य सनातन विश्व मानता
हिय बंधन श्री राम को।।

©संजय कौशिक 'विज्ञात'

Tuesday, December 13, 2022

आदियोगी : संजय कौशिक 'विज्ञात' : मापनी ~21/21



आदियोगी
संजय कौशिक 'विज्ञात'
मापनी ~21/21

सौर मण्डल में चमकते सूर्य अगणित
उष्ण ऊर्जा दह रहे हैं आदि योगी।
चन्द्र सा शीतल किया अम्बर धरा को
धार बन कर बह रहे हैं आदि योगी।।

ज्ञान के विज्ञान का दे रूप अनुपम।
तेज उज्जवलमय तथा उत्तम निरुपम।।
अनुकरण कर सुषम्ना का श्रेष्ठ अद्भुत।
योगियों का है सनातन योग अच्युत।।
नाद अनहद ॐ बन अन्तस् समाये।
वाद्य सुर बन कह रहे हैं आदि योगी।।

केंद्र आज्ञा चक्र स्थावर और जंगम।
मौन पद्मासन हुए योगी विहंगम।।
सप्त तन के भेद करते से प्रमाणित।
एक आत्मा ही रहे कहते सदा नित।।
सृष्टि के इस कष्ट का हर काल कहता।
नित हृदय में रह रहे हैं आदि योगी।।

भाव व्याख्या सूक्ष्म विस्तृत के विचारक।
शब्द संज्ञा व्याकरण के एक कारक।।
गूढ़ से हर वेद शास्त्रों के प्रणेता।
बन विषय नित इंद्रियों को हर्ष देता।।
पंच तत्वों का स्वयं ये सार बोले।
दाह विष की सह रहे हैं आदि योगी।।

नित महामुद्रा महाबंधी हठीले।
खेचरी मुद्रा महावेधी सजीले।।
यूँ सदा हठ योगियों का योग ख़िलता।
ध्यान के अंतःकरण में नेह मिलता।।
खिलखिलाकर चित्त हँसते की तरंगें।
बोल उठती यह रहे हैं आदियोगी।।

©संजय कौशिक 'विज्ञात'


Thursday, December 8, 2022

नवगीत ; विरहन ; संजय कौशिक 'विज्ञात'

नवगीत
विरहन
संजय कौशिक 'विज्ञात'
मुखडा - 14/9
अन्तरा - 14/14

यामिनी को मौन कुछ यूँ 
कर गई विरहन।
एक बाती सी बुझी जब
मर गई विरहन।।

उस तिमिर की आस झूठी 
सो गए खद्योत सारे
बादलों की आड़ लेकर
ओट में बैठे सितारे
मौन अवगुंठन दहकता 
भर गई विरहन।।

व्याप्त चहुँदिश सनसनाहट
वेदना की तान लहरें
वो मल्हारी नेत्र बरसे
शुष्क थी पर कोर नहरें 
पतझड़ी बहकर बयारी 
झर गई विरहन।।

द्वैत की जलती कथा का 
सार विरही उर तड़पता
आहटों का शोर गूँजे 
शांति को जो नित हड़पता
घूम कर पगडंडियों पर 
घर गई विरहन।।

©संजय कौशिक 'विज्ञात' 


Friday, November 25, 2022

मेंहदी-महावर संजय कौशिक 'विज्ञात'


कविता / गीत
मेंहदी-महावर
संजय कौशिक 'विज्ञात'
मापनी ~ 16/16

मेंहदी रचाती जब सजनी
देख महावर करे प्रतीक्षा
राग विराग हृदय की तड़पन
करे परीक्षण दृष्टि तिरीक्षा।।

बिंदी की आभा विचलनमय
अंगारों सी जगी तितिक्षा 
फेरों की वे स्मृतियाँ उलझी
विस्मृति पाकर बहकी इक्षा
विरहन जैसी ज्वाला दहकी
विरह मिलन की करे समीक्षा 

करुण व्यथित सा नेत्र द्रवित कर
आहत उर की भूला रक्षा
कंगन की खनखन सूनी सी
सूनी पगडंडी ने भक्षा
व्याकुल अंतः करण प्रताड़ित 
हिय स्पंदन जब चली परीक्षा।।

नील कुरिंजी पुष्प सुगंधित 
देता सा गजरे को शिक्षा 
काल कुसुम स्थिर उर का खिलना
हर्षित क्षण की भूले भिक्षा
ठहर देखती व्याप्त वेदना
चंद्र-चकोरी प्राप्त निरीक्षा।।


©संजय कौशिक 'विज्ञात'

Sunday, September 18, 2022

गीत : हिन्दी को सम्मान मिला : संजय कौशिक 'विज्ञात'


गीत 
हिन्दी को सम्मान मिला
संजय कौशिक 'विज्ञात'

देवनागरी की स्तुति करके
हिन्दी को वरदान मिला
संस्कृत का कुल उत्तम वर्णित
हिन्दी को सम्मान मिला।।

स्वर व्यंजन का मेल मिला तब
शब्दों ने ली अँगड़ाई
बना व्याकरण मात्रा खिलती
भावों की यह चतुराई
मुकुट चंद्र बिंदी का धरके
वर्णों को अभिमान मिला।।

करे हलन्त वर्ण को आधा
शब्दों में उत्साह भरे
कर पग वंदन बैठ साथ में
कुछ के सिर पर राज करे
व्यर्थ नहीं है आधा भी कुछ 
उसको गौरव गान मिला।।

अनुस्वार का मार्ग नासिका
लघु भी गुरु हो जाते हैं 
यही श्वास मुख मण्डल विचरे
पृथक वर्ग कहलाते हैं
तीन मिलेंगे अंत खड़े जो 
उनको कुछ व्यवधान मिला।।

गुण विसर्ग का अनुस्वार सा
लघु गुरु हों नित संगत से
नहीं किसी को छोटा समझो
ज्ञान वर्ण दे इस रंगत से
वैज्ञानिक भी शोध करें अब 
उत्तम ये विज्ञान मिला।।

कण्ठ तालु मूर्द्धा उच्चारण 
दन्त ओष्ठ का बोल कहा
कण्ठतालु कण्ठोष्ठय फिर यूँ
दन्तोष्ठ्य भी खोल कहा
मुख मण्डल से वर्ण निकलते
योग्य इन्हें ये स्थान मिला।।

©संजय कौशिक 'विज्ञात'

Sunday, August 28, 2022

नवधा भक्ति के प्रकार, रूप, एवं उदाहरण : संजय कौशिक 'विज्ञात'


नवधा भक्ति के प्रकार, रूप, एवं उदाहरण

गत कई दिनों से पूछा जा रहा था नवधा भक्ति का क्या अर्थ है इसके रूप कैसे हैं और इनको करने वाले भक्तों के नाम आदि भी जिज्ञासा प्रकट रूप से मेरे समक्ष आई थी तो आज मैं नवधा भक्ति के साथ उपस्थित हुआ हूँ।
वैसे तो नवधा भक्ति को हम इस श्लोक के माध्यम से समझ सकते हैं। कुछ सरलता के उद्देश्य से मैंने कुछ दोहे कहे हैं देखिये और समझिए ये प्रयास सरलता से कहाँ तक स्पष्ट हो सका ..... 
श्लोक :-
श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्।
अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम् ॥

दोहे :-

भक्ति मार्ग प्रत्यक्ष कब, कहते इसे परोक्ष।
ध्यान धरे साधक अगर, भक्ति भुक्ति दे मोक्ष।।

करता नवधा भक्ति जो, पा लेता है लक्ष्य।
लख चौरासी योनियाँ, तत्क्षण होती भक्ष्य।।

श्रवण भेद नवधा प्रथम, कथा भक्त की प्यास।
श्रवण परीक्षित ने किया, पूर्ण हुई फिर आस।।

कीर्तन भेद द्वितीय है, इसमें स्तुति का गान।
नाम सुना शुकदेव जी, कीर्तन की पहचान।।

रखते 'स्मरण' तृतीय पर, नित्य स्मरण कर शक्ति।
यूँ बालक प्रह्लाद के, हृदय जगी थी भक्ति।।

भक्ति पादसेवन कही, यह चतुर्थ है रूप।
जैसे लक्ष्मी ने किया, पाया स्थान अनूप।।

अर्चन पंचम भेद है, कर्म वचन मन साध।
राजा पृथु ने ज्यों किया, अर्चन नित निर्बाध।।

वंदन षष्ठम भेद है, करना नित्य प्रणाम।
सेवक बन अक्रूर ज्यूँ, नमन करे निष्काम।।

दास्य भक्ति सप्तम कही, बन स्वामी का दास।
राम भक्ति हनुमान की, करती हृदय उजास।।

सख्य भेद अष्टम कहा, समझ ईश को मित्र।
पार्थ सुदामा द्रोपदी, सख्य सुगंधित इत्र।।

आत्मनिवेदन है नवम, भक्ति भाव का रूप।
जैसे राजा बलि हुए, आत्मनिवेदित भूप।।

मीरा के प्रेमी बने, कृष्णचन्द्र घनश्याम।
साध्य कहें निज प्रेमिका, अड़े सँवारे काम।।

शबरी के आतिथ्य से, हर्षे राम प्रचण्ड।
खाये जूठे बेर ज्यूँ, वो था भाव अखण्ड।।

भक्ति कही है भाव की, भावों का उद्योग।
योग साधना है पृथक, और पृथक हठयोग।।

इस नवधा से भी पृथक, हुए करोड़ों भक्त।
जिसकी जैसी भावना, वैसे देव सशक्त।।

मुक्त हुए वसुदेव जब, सांकल ताले तोड़।
पुत्र रूप भगवान का, ये था अद्भुत जोड़।।

गंगा से पावन कही, भक्त अश्रु की बूँद।
भजता है जो भाव से, अपनी आँखें मूँद।।

सुमरण खा जीवन चले, विद्या पी विद्वान।
भक्ति में खोकर मिले, भक्तों को भगवान।।

कोमल तथा सशक्त से, रहें भक्त के भाव।
केवट चरण पखारके, पार लगाते नाव।

नवधा भक्ति से खुले, विषय मुक्ति का द्वार।
प्रभु के सुमिरन के बिना, नही जीव उद्धार।।

©संजय कौशिक 'विज्ञात'