Tuesday, February 18, 2020

निश्चल छंद आधारित गीत संजय कौशिक 'विज्ञात'





निश्चल छंद     आधारित गीत 
संजय कौशिक 'विज्ञात'

निश्चल छंद एक सम मात्रिक छंद है जिसमें 16,7 पर यति के साथ 23 मात्रा के 4 चरण होते हैं। प्रति 2-2 पंक्ति के तुकांत सम तुकांत रहते हैं प्रति चरण का अंत गाल(21, गुरु लघु से किया जाता है। साधारण शब्दों में चौपाई का एक चरण 16 मात्रा + 7 मात्रा होती हैं अंत गाल
 16,+7= 23 मात्रा चरणान्त गाल 
तो आइये इसे उदाहरण से समझते हैं 

निश्चल छंद     आधारित गीत 
संजय कौशिक 'विज्ञात'


एक पुराना वृक्ष खड़ा था, 
घर में नीम। 
जिसे गिरा कर भीत खींच दी, 
सपने सीम॥

1
संबंधों में असर दिखाये, 
मिटे बुखार। 
एक लता की बात सुनो कह, 
घटता प्यार॥
झड़ी हुई ढेरों निम्बोली, 
का ये सार।
झाड़ दिये सब द्रुम पतझड़ ने, 
कर व्यवहार॥ 

आँगन में सौ बार पड़े थे, 
बिखरे ढीम.....
एक पुराना वृक्ष खड़ा था, 
घर में नीम। 

संदेश समीर बहे तो दे, 
ध्वनि कर पात।
और आँधियों से बतियाता, 
गरजे बात॥ 
अधिक ठण्ड में आँसू झरते, 
नित्य प्रभात। 
गर्मी लू में खड़ा रहा था, 
सह दिन रात॥ 

पता बना था पूर्ण गाँव में, 
बड़ा मुनीम..... 
एक पुराना वृक्ष खड़ा था, 
घर में नीम।

3
आज गिराया नीम जहाँ से, 
गड्ढा खोद।
सौ-सौ बार गिरी बिजली थी, 
मिटा प्रमोद॥ 
हास्य शोक में बदल पड़ा वो, 
माँ की गोद। 
अन्तस् मन की चर्चित चर्चा, 
रिसता क्षोद॥ 
दहक उठा मन हुआ बावला, 
जलता रीम.....
एक पुराना वृक्ष खड़ा था, 
घर में नीम।

संजय कौशिक 'विज्ञात'

35 comments:

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  2. निश्चल छंद की सुंदर जानकारी 👌👌👌 शानदार गीत 👏👏👏

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  3. बहुत ही सुन्दर अद्भुत छंद👌👌👌👌👌👌आपके माध्यम से हर रोज एक नवीन छंद की जानकारी मिल रही है।💐💐

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  4. अति सुन्दर भावपूर्ण गीत रचना। , हार्दिक बधाई।

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  5. अद्भुत भावपूर्ण सृजन

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  6. निश्चल छंद की बहुत ही सुंदर जानकारी

    आज गिराया नीम जहाँ से,
    गड्ढा खोद।
    सौ-सौ बार गिरी बिजली थी,
    मिटा प्रमोद॥

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  7. वाह अद्भुत लेखन, एक और सुंदर छंद, वाह बेहतरीन रचना 👌👌💐

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  9. बहुत खूब जी वाह वाह वाह

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  10. वाह वाह सुंदर जानकारी अलग-अलग छंदों के बारे में बहुत खूब आदरणीय बहुत बढ़िया

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  11. अति सुन्दर सर जी

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  12. बहुत खूब आद. वाह

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  13. हास्य शोक में बदल पड़ा वो, माँ की गोद।
    उत्कृष्ट रुपक का परिदर्शन बोध हुआ। श्लाघनीय सर्जना। अशेष मंगलकामना परमात्मन!💐💐

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    1. आत्मीय आभार रामचंद्र प्रधान जी

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  14. अनुपम सृजन
    आ.सर जी शुभकामनाएं 🙏

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  15. सुन्दर छंद बेहतरीन सृजन आदरणीय👌👌👌

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