विज्ञात की कलम

छंदबद्ध लेखन एक कवि के लिए उतना ही आवश्यक है जितना दो तटों के मध्य बहती हुई सरिता के लिए उन दो तटों का होना होता है। मेरा मानना है कि कवि की कल्पना/यथार्थ की कविता जब निश्चित छंद में बंध कर उत्तम गेयता प्राप्त करके पाठक /श्रोता तक पहुँचती है तो वह अपने अलग ही चुम्बकीय आकर्षण से और भी अधिक असर कारक होती है... इस ब्लॉग की सभी रचनाएं स्वरचित एवं मौलिक हैं। © विज्ञात की कलम

Sunday, March 15, 2026

गीतिका :- धर अधर पे ऊर्ध्व अपना / अनकही बातें बहुत सी डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’

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गीतिका १ अनकही बातें बहुत सी उन पलों की रह गई। साँझ सिंदूरी सिसकती स्मृति-सरस में बह गई।। १ मंद मृदु मुस्कान मध्यम मन–मुकुल में ...
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Tuesday, February 17, 2026

स्पर्श तुम्हारा ... डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’

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स्पर्श तुम्हारा   डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’ स्थाई 🌿🌹🌷🥀🌾 मौन मलय मूरत मन-मंदिर, मधुर मिलन को मीत कहे।। स्पर्श तुम्हारा ऋतु-वि...
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Monday, February 16, 2026

यक्ष प्रश्न प्रतिबिंब का – डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’

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यक्ष प्रश्न प्रतिबिंब का प्रतिबिंब प्रश्न करता ये मेरा  क्यों पैदा करने को आतुर थे। मौन हुई अंतस की गहराई क्षोभ हृदय के उत्कंठात...
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देख गाँव ये... डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’

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शीर्षक - देख गाँव ये... डॉ संजय कौशिक 'विज्ञात' स्थाई ✍️ देख गाँव ये, डगर नाचती। दिखे जहाँ हर खुशी पली।(नायिका) गाँव लगे...
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Sunday, November 17, 2024

गीतिका : डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’

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गीतिका  डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’ मापनी  2122 2122 2122 212 रात जो बीती हुई है क्या भुलानी चाहिए। भूल से भूली हुई क्या स्मृति मिट...
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Sunday, November 10, 2024

गीता का विधान ; भक्ति गीत। ; डॉ. संजय कौशिक ’विज्ञात’

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🙏 भक्ति गीत 🙏 📕 *गीता का विधान* 📕 मन ही मन में जपता चल तू  गीता कहे विधान को  *हृदय बसा हनुमान को।।* जीवन रथ पर ध्वज हो इनका...
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Friday, May 24, 2024

कहानी कैसे लिखें? कहानी लेखन की संक्षिप्त जानकारी – संजय कौशिक 'विज्ञात'

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कहानी कैसे लिखें? कहानी लेखन की संक्षिप्त जानकारी – संजय कौशिक 'विज्ञात' अच्छी कहानी लिखने के मुख्य सुझाव- 1 पात्रों का ...
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